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नाशिक-पुणे रेलवे रूट बदलाव विवाद: क्या है पूरा मामला और नागरिकों को क्या जानना चाहिए

10 August 2026•6 min read•By UPSeva Team

Quick summary

At a glance

नाशिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे का मूल रूट GMRT रेडियो टेलिस्कोप के सिग्नल इंटरफेरेंस के कारण बदला गया। महाराष्ट्र सरकार ने डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है जो 60 दिन में रिपोर्ट देगी।

Key facts

परियोजना
नाशिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (2018 से प्रस्तावित)
मूल रूट
सिन्नर-अकोले-संगमनेर-नारायणगांव (सीधा और छोटा रास्ता)
संशोधित रूट
अहिल्यानगर और शिर्डी होते हुए (GMRT से बचाव के लिए)
एक्सपर्ट कमेटी
डॉ. अनिल काकोडकर (अध्यक्ष), विवेक गुप्ता (रेलवे बोर्ड), पुणे और नाशिक के डिवीजनल कमिश्नर
रिपोर्ट की समय-सीमा
60 दिन (अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक)

Timeline

  1. 2018

    नाशिक-पुणे रेल कॉरिडोर पहली बार प्रस्तावित

  2. फरवरी 2023

    रेल मंत्रालय ने GMRT के पास वाले मूल अलाइनमेंट को सैद्धांतिक मंजूरी दी

  3. 17 जून 2026

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अहिल्यानगर-शिर्डी वाले नए रूट का संशोधित DPR पूरा होने की घोषणा की

  4. अगस्त 2026 (पहला सप्ताह)

    महाराष्ट्र सरकार ने GR जारी कर डॉ. काकोडकर की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया

  5. 9 अगस्त 2026

    MLC सत्यजीत तांबे के नेतृत्व में चक्का जाम प्रदर्शन — तांबे समेत कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए

नागरिक क्या कर सकते हैं

  1. कमेटी की सार्वजनिक सुनवाई में भाग लें (तारीखों के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें)।
  2. अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधि (MLA/MP) को लिखित अभ्यावेदन दें।
  3. महाराष्ट्र रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MahaRail) की वेबसाइट पर अपडेट देखें।
  4. कमेटी की रिपोर्ट के बाद महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर निर्णय का इंतजार करें।

संक्षेप में: नाशिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे का मूल रूट बदलने के विरोध में 9 अगस्त 2026 (अगस्त क्रांति दिवस) को बड़ा चक्का जाम प्रदर्शन हुआ। MLC सत्यजीत तांबे समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट कमेटी बना दी है जो 60 दिन में जांच कर बताएगी कि मूल रूट को GMRT को बिना नुकसान पहुंचाए रखा जा सकता है या नहीं।

ये विवाद क्यों शुरू हुआ?

नाशिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर पहली बार 2018 में प्रस्तावित हुआ था। इसका मूल और सीधा रूट सिन्नर-अकोले-संगमनेर-नारायणगांव होते हुए जाना था। इस रूट पर बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण भी हो चुका था और किसानों को मुआवजा दिया जा चुका था।

फरवरी 2023 में रेल मंत्रालय ने इसी अलाइनमेंट को सैद्धांतिक मंजूरी (in-principle approval) दे दी। लेकिन तभी वैज्ञानिकों और खगोल विज्ञान संस्थानों ने आपत्ति जताई।

GMRT का क्या रोल है?

पुणे जिले के खोदड़ (नारायणगांव के पास) में Giant Metrewave Radio Telescope (GMRT) स्थित है। यह 30 पूरी तरह घुमाई जा सकने वाली 45-मीटर डिश वाली एक शक्तिशाली रेडियो टेलिस्कोप ऐरे है, जिसे National Centre for Radio Astrophysics (NCRA) संचालित करता है। यह पल्सर, दूरस्थ आकाशगंगाओं और अंतरिक्ष से आने वाली लो-फ्रीक्वेंसी रेडियो तरंगों का अध्ययन करता है।

वैज्ञानिकों ने चिंता जताई कि GMRT के पास से रेलवे लाइन गुजरने पर ट्रेनों से उत्पन्न electromagnetic interference टेलिस्कोप की संवेदनशील खगोलीय ऑब्जर्वेशन को प्रभावित कर सकता है। GMRT के चारों ओर एक radio-silence zone है, जहां किसी भी तरह का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक डिस्टर्बेंस नहीं होना चाहिए।

इन आपत्तियों के बाद GMRT से बचने के लिए वैकल्पिक रूट की तलाश शुरू हुई।

रूट क्यों और कैसे बदला गया?

17 जून 2026 को पुणे दौरे के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि अहिल्यानगर और शिर्डी होते हुए नए रूट का संशोधित Detailed Project Report (DPR) पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि GMRT के पास से गुजरने वाला मूल अलाइनमेंट तकनीकी रूप से संभव नहीं (technically infeasible) है।

पहलूमूल रूट (Original)संशोधित रूट (Revised)
रास्तासिन्नर → अकोले → संगमनेर → नारायणगांव → पुणेअहिल्यानगर → शिर्डी → पुणे
दूरीसीधा और छोटालंबा रास्ता
GMRT प्रभावटेलिस्कोप के पास से गुजरताGMRT से दूर
जमीन अधिग्रहणपूरा हो चुका, मुआवजा दिया गयानया अधिग्रहण करना पड़ेगा

एक्सपर्ट कमेटी का गठन

रूट बदलाव के विरोध के बाद संगमनेर और अकोले क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधियों और जनता ने राज्य सरकार को अभ्यावेदन दिए। इन अभ्यावेदनों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने Government Resolution (GR) जारी कर एक चार सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया:

सदस्यपद
डॉ. अनिल काकोडकरपूर्व अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग (कमेटी अध्यक्ष)
विवेक गुप्तासदस्य (इंफ्रास्ट्रक्चर), रेलवे बोर्ड
पुणे के डिवीजनल कमिश्नरसदस्य
नाशिक के डिवीजनल कमिश्नरसदस्य

कमेटी को यह जांच करने का काम सौंपा गया है कि क्या मूल अलाइनमेंट — या एलिवेटेड स्ट्रेच, सीमित री-अलाइनमेंट या टनलिंग जैसे इंजीनियरिंग उपायों के साथ संशोधित संस्करण — GMRT के रेडियो-साइलेंस ज़ोन की सुरक्षा करते हुए लागू किया जा सकता है।

MahaRail (महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) को निर्देश दिया गया है कि वह दोनों अलाइनमेंट (मूल और संशोधित) से जुड़े DPR, सर्वे डेटा, अलाइनमेंट ड्रॉइंग और लागत अनुमान कमेटी के सामने रखे।

कमेटी को 60 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी हैं — मतलब अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक।

9 अगस्त 2026 का प्रदर्शन

MLC सत्यजीत तांबे (कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट के भतीजे) ने 9 अगस्त — अगस्त क्रांति दिवस — पर नाशिक-पुणे हाईवे पर चक्का जाम आंदोलन का आह्वान किया। हजारों लोग, खासकर युवा प्रदर्शनकारी, सड़कों पर उतरे।

प्रदर्शन के दौरान:

  • पुलिस ने सत्यजीत तांबे को सिन्नर पुलिस स्टेशन पर हिरासत में ले लिया (बाद में 1-2 घंटे में छोड़ दिया गया)।
  • पूर्व मंत्री बालासाहेब थोराट और नाशिक सांसद राजाभाऊ वाजे भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
  • महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने तांबे से फोन पर बात की और लिखित आश्वासन देने की बात कही।
  • हाईवे पर यातायात बाधित हुआ।

सत्यजीत तांबे ने कहा: "यह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि जनता की वर्षों की मांग का जनांदोलन है। नाशिक-पुणे रेलवे मूल प्रस्तावित रूट पर ही बनना चाहिए। हम किसी भी कारण से रूट बदलाव स्वीकार नहीं करेंगे।"

उन्होंने यह भी मांग की कि:

  • कमेटी का काम सिर्फ GMRT के तकनीकी मुद्दों तक सीमित न रहे
  • हर तालुका में सार्वजनिक संवाद (public dialogues) कराए जाएं
  • 60 दिन के अंदर निर्णय लिया जाए, डेडलाइन आगे न बढ़ाई जाए
  • प्रोजेक्ट पर ₹500 करोड़ से अधिक खर्च हो चुका है और स्टेशन निर्माण की टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है

आगे क्या होगा?

  1. कमेटी की रिपोर्ट (अक्टूबर 2026 तक): डॉ. काकोडकर कमेटी तय करेगी कि मूल रूट इंजीनियरिंग उपायों के साथ संभव है या नहीं।
  2. राज्य सरकार का निर्णय: रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र सरकार अंतिम रूट तय करेगी।
  3. केंद्र सरकार से समन्वय: चूंकि रेलवे केंद्र सरकार का विषय है, रेल मंत्रालय की सहमति भी जरूरी होगी।
  4. सार्वजनिक सुनवाई: अगर कमेटी सार्वजनिक सुनवाई करती है, तो प्रभावित नागरिक अपनी बात रख सकते हैं।

नागरिकों के लिए जरूरी जानकारी

इस परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों (नाशिक, सिन्नर, अकोले, संगमनेर, नारायणगांव, अहिल्यानगर, शिर्डी) के नागरिकों को सलाह:

  • अपडेट के लिए: MahaRail की आधिकारिक वेबसाइट और स्थानीय प्रशासन के नोटिस बोर्ड पर नजर रखें।
  • अपनी बात रखने के लिए: कमेटी की सार्वजनिक सुनवाई की घोषणा होने पर भाग लें, या अपने स्थानीय MLA/MP को लिखित ज्ञापन दें।
  • जमीन/मुआवजे के मामले: जिन किसानों का जमीन अधिग्रहण हुआ है और मुआवजा मिल चुका है, वे रूट बदलाव की स्थिति में जिला प्रशासन से संपर्क करें।
  • अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बजाय केवल आधिकारिक सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करें।

Sources / स्रोत

Last checked: 10 August 2026. यह एक नागरिक जागरूकता व्याख्यात्मक लेख (civic awareness explainer) है, कानूनी सलाह या सरकारी अधिसूचना नहीं।

Source: Official UP Government Notifications

Last updated: 10 August 2026

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